31.1.18

रानी मुखर्जी फिल्म 'हिचकी' से लौट रही है बॉलीवुड

'हिचकी' फूल फ्री मूवी रिव्यू

यशराज फिल्म्स के बैनर निर्मित फिल्म 'हिचकी' एक सामाजिक कहानी को लेकर बनाई गई है जिसमें जन्मजात खामियां को लेकर पैदा होने वाले विदुषी महिला की संर्घष को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी शुरू होती है नैना माथुर यानी रानी मुखर्जी से जो कि हिच्की के कारण मन पंदस जॉब नहीं कर पा रही है। नैना माथुर टीचिंग करना चाहती है किन्तु स्कूल प्रशासन उनकी हिच्की के कारण असमर्थता जताते हुये करते है कि आपकी आवाजे सुनकर बच्चे कक्षा में हंसते ही रहेंगे। नैना माथुर कारण बताती है कि हिच्की क्यों आती है, बड़ी मेहनत के बाद एक स्कूल उसे एक मौका देने का तैयार होता है। 

वह ऐसे बच्चे जो शिक्षा के अधिकार कानून के कारण प्रवेश पाये है और गरीब, मध्यम वर्ग से आते है। कक्षा शुरू होते ही बच्चे नैना को काफी परेशान करने लगते है, कभी हिच्की का नकल करते है तो कभी उनके साथ कक्षा में शरारत। नैना यानी रानी मुखर्जी काफी परेशान हो जाती है तक स्कूल का प्यून बताता है कि गलती बच्चों के नहीं है बल्कि यहां के माहौल का है क्योंकि किसी ने उसे दिल से स्वीकारा ही नहीं है। अमीर बच्चों, शिक्षकों और प्रबंधन के बेरूखे बरताव के कारण ये बच्चे पढ़ाई कम और बगावत ज्यादा करते है। प्यून के इन कथनों ने तो फिल्म के साथ-साथ नैना माथुर की जिंदगी की दिशा ही बदल दिया और फिर एक दुख मोड़ पर आकर फिल्म समाप्त होता है।

'हिचकी' का निर्देशन किया है सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने और निर्मिता है मनीष शर्मा। यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म फ्रंट ऑफ द क्लास से प्रेरित है। फ्रंट ऑफ द क्लास में यह बताया गया था कि कैसे टॉरेट सिंड्रोम टीचर संघर्ष करती है। इस फिल्म में रानी मुखर्जी एक शिक्षिका की प्रमुख भूमिका है जो कि बार-बार 'हिचकी' लेती रहती है। आतीश के रूप में हर्ष मयूर, सुप्रिया पिल्गांवकर, कुणाल शिंदे, शिवकुमार सुब्रमण्यम, नीरज कबी, आसिफ बसरा, प्राचार्य के रूप में इवान रॉड्रिक्स और सुप्रियो बोस वरिष्ठ पुरुष शिक्षक के किरदार में है। 

  • निर्माता- मनीष शर्मा, आदित्य चोपड़ा
  • निर्देशित- सिद्धार्थ पी मल्होत्रा
  • पटकथा- अनकुर चौधरी, अंबर हदप, गणेश पंडित
  • संगीत- जसलिन रॉयल
  • कंपनी- यश राज फिल्म्स
  • रिलीज़ की तारीख- 23 फरवरी 2018


 


 


 


 


 


 




30.1.18

फिल्म 'राधे अंगुठाछाप' में करण खान का अभिनय के साथ निर्देशन भी

छत्तीसगढ़ी सिनेमा में पारिवारिक हास्य फिल्मों स्वर्णीम दौर रहा है। विडियों फिल्म और फिचर फिल्मों को मिलाकार अब तक लगभग सैकड़ों फिल्म बन चूकी है जिसमें सफलता पारिवारिक हास्य फिल्मों को ही मिला है। इससे यह भान होता है कि छत्तीसगढ़ में साफ-सुथरी पारिवारिक हास्य और सुमधुर गीत संगीत होना फिल्मी की सफलता की गारंटी देता है। वर्षो बाद एक बार फिर पारिवारिक हास्य फिल्म लेकर आ रहे है निर्माता जेठू साहू और निर्देशक करन खान। फिल्म 'राधे अंगुठाछाप' में करण खान का अभिनय के साथ-साथ निर्देशन का भी कमाल देखने को मिलेगा।


फिल्म की कहानी शुरू होती है शिवचरण कका के घर से जहां उनका अंगुठाछाप बेटा अपने हरकतों से गांव के लोगों को परेशान करते रहता है। नटखट, चुलबुले और मासुमियत से भरे राधे को गांव में जितने लोग ताना मारते थे उतने लोग उनका चाहते भी थे। शिकायतों से परेशान होकर उनके पिता जी उनकी शादी करने की सोचते है राधे के मन में लड्डू फूटने लगाता है किन्तु लड़की उससे अंगुठाछाप होने के कारण शादी से इंकार कर देती है। बाद में परिस्थिति कुछ ऐसी आती है कि राधे को गांव छोड़ना पड़ता है।


शहर में इत्तेफाक से उनके एक अच्छा काम हो जाता है, बैंक डकैतों के गिरोह हो पकड़वाने के कारण सरकार उनकों करोड़ों रूपये इनम में देती है। राधे का पास पैसा आने के बाद से फिल्म की कहानी करवट लेते है और फिर शुरू होता है उनके रूपये को हथियाने का खेल। कई लोग उनके पीछे लगे रहते है, उनेक मोड़ आता है उन सबका बड़ी चालाकी से सामाना करते हुये फिल्म का अंगुठाछाप नायक राधे दर्शकों को हंसाते-गुदगुदाते संदेश के साथ फिल्म की कहानी को अंजाम तक पहुंचाता है।




  • निर्माता— जेठू साहू, 
  • निेर्देशन कथा पटकथा— करण खान, 
  • गीत— बेनी प्रसाद, पुरूषोत्तम, अमित प्रधान, 
  • संगीत— अमित प्रधान, 
  • कलाकार— करण खान, लवली अहमद, माहिरा खान, अनुकृति चौहान, उपासना वैष्णव, आशीष सेन्द्रे, प्रदीप शर्मा, जेठू साहू, संतोष यादव, प्रदीप शर्मा, बोचकू


















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